वह तस्वीरमीरा पूरी रात सो नहीं पाई।उसके हाथ में वही पुरानी तस्वीर थी।तस्वीर में दो छोटे बच्चे एक साथ खड़े थे।लड़की के चेहरे पर वही मुस्कान थी जो आज मीरा के चेहरे पर थी।और लड़का…मीरा उस चेहरे को जितना देखती, उसका दिल उतनी तेजी से धड़कने लगता।उसने तस्वीर पलटी।पीछे सिर्फ एक तारीख लिखी थी—15 जुलाई 2012और नीचे एक नाम—“आरव”मीरा की आँखें फैल गईं।“ये कैसे हो सकता है?”उसे अपने बचपन की बहुत कम बातें याद थीं।बस एक धुंधली-सी याद…बारिश…एक छोटा-सा घर…और एक लड़का जो उससे कह रहा था—“डरो मत, मैं तुम्हारे साथ हूँ।”अचानक मीरा के कमरे की लाइट बंद हो गई।वह