अँधेरे वाला स्टेशन - भाग 3

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छत से लटकता साया और माधव का राजकबीर के हाथ में पकड़े मोबाइल फोन की टॉर्च की रोशनी जैसे ही बर्थ नंबर 41 के ऊपर सीलिंग पर पड़ी, पूरे डिब्बे में सांसें अटक गईं।वहाँ, छत से उल्टे लटके हुए उस साए के दोनों पैर सीलिंग के पंखे के खांचे में किसी चमगादड़ की तरह फंसे हुए थे। उसके लंबे, काले और उलझे हुए बाल नीचे की ओर झूल रहे थे। उसका सूखा, पीला चेहरा कबीर से महज तीन फीट की दूरी पर था। उसकी पुतली-विहीन सफेद आँखें कबीर की आँखों में गड़ी थीं, और उसके सड़े हुए नीले होंठों पर