बाबूजी की हिचकी

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                  बाबूजी बिस्तर पर लेटे हुए थे। मुझे देखते ही उठ कर बैठ लिए।                  अविलंब पहले की तरह खड़े न हुए।                  मैं उन की बगल पर जा बैठी।                 उन के कंधे थोड़े और झुक लिए थे।                “कैसे?” वह बोले। अपने आने की मैं ने उन्हें कोई पूर्व सूचना न दी थी।                “सरकार की एक