Philosophy of Non-Finality / गति स्वभाव है, लक्ष्य मन का भ्रम वेदांत 2.0 — अंतिम स्वतंत्रता घोषणादेखो — पर मानना आवश्यक नहींजीवन, स्वतंत्रता और प्रत्यक्ष दर्शन का अदोगमैटिक दर्शन लेखक: कुमार मनीषस्वतंत्र शोधकर्ता एवं दार्शनिक | वेदांत 2.0 ©ORCID: 0009-0000-8083-0685 | 2026 सार अधिकांश अस्तित्वगत दुःख जीवन से सीधे नहीं, बल्कि प्रत्यक्ष अनुभव और मानसिक व्याख्या के बीच की दूरी से उत्पन्न होते हैं। शरीर वर्तमान में है, चेतना कल्पित भविष्य में। इसी दूरी में आध्यात्मिक आउटसोर्सिंग, पूर्व-निष्कर्ष और भविष्य-पलायन जन्म लेते हैं। वेदांत 2.0 उस दूरी को कम करने की संशोधन-योग्य पद्धति है - अवलोकन-प्रथम, शून्य-बिंदु, खुली जाँच और