प्रस्तावना: तमस का साम्राज्य और अदृश्य आशाकलयुग का वातावरण: सन 4,28,126 ईस्वीसन 4,28,126 ईस्वी का यह भयानक काल-चक्र संपूर्ण ब्रह्मांड का सबसे खौफनाक, क्रूर और घिनौना दौर बन चुका था। मानवीय चेतना पूर्णतः भस्म हो चुकी थी और समूची सृष्टि पर कलयुग का एकछत्र, अजेय अधिकार स्थापित हो चुका था। वायुमंडल में शुद्ध वायु की जगह केवल छह महा-विकारों—काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद और मत्सर—की सड़ांध व्याप्त थी। कलयुगी अस्त्रों और घातक तकनीकों से निकले विषैले काले धुएं ने आकाश को पूरी तरह से निगल लिया था, जिससे धरती पर सूर्य की एक भी किरण पहुँचना पूरी तरह बंद हो