एक औरत की ज़िंदगी

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क्या आपने कभी सोचा है कि एक औरत अपनी पूरी ज़िंदगी दूसरों के नाम करके भी मुस्कुरा कैसे लेती है?एक औरत की अनकही दास्तान:सुबह के पाँच बज रहे हैं। पूरा शहर अभी गहरी नींद में सोया हुआ है, लेकिन रसोई से हल्की-हल्की आवाज़ें आने लगी हैं। यह आवाज़ है अनिता की, जो हर रोज़ सूरज के उगने से पहले ही जाग जाती है। उसके दिन की शुरुआत किसी अलार्म से नहीं, बल्कि अपनी पारिवारिक ज़िम्मेदारियों की आहट से होती है।अनिता भी कभी एक छोटी सी बच्ची थी, जिसके आँखों में अनगिनत सपने थे। वह खुले आसमान में उड़ना चाहती थी,