अधूरी तड़प, ख़ामोश छुअन

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पुरानी हवेलीनुमा मकान की सबसे ऊपरी मंज़िल के कमरे में आरोही की एक अलग ही दुनिया बसती थी। घर में सिर्फ़ तीन लोग थे—उसका बड़ा भाई रोहन, भाभी कविता और वो ख़ुद। भाई का दिन का ज़्यादातर वक़्त दफ़्तर और कारोबारी दौरों में गुज़रता था, जिससे घर पर अक्सर एक अजीब-सा, भारी सन्नाटा पसरा रहता। इसी सन्नाटे के बीच आरोही के सीने में एक बेनाम बेचैनी, एक अनकही प्यास सुलगती रहती थी। वह इक्कीस साल की थी, और जवानी की दहलीज पर खड़ी उसकी देह रोमांस और किसी के गहरे स्पर्श के लिए तड़पती थी।इस तड़प को निकालने का उसका