रुद्राक्षोषनिषद--यह उपनिषद के क्रम में 97वें स्थान पर आता है,रुद्राक्षोपनिषद् (रुद्राक्षजाबालोपनिषद्) अथर्ववेद से सम्बद्ध एक लघु उपनिषद् है, जिसमें रुद्राक्ष की उत्पत्ति, महत्त्व, धारण-विधि और आध्यात्मिक फल का वर्णन मिलता है।रुद्राक्षजाबालोपनिषद् — सम्पूर्ण मंत्र एवं हिन्दी अर्थरुद्राक्षजाबालोपनिषद् शैव-परम्परा की उपनिषद् है। उपलब्ध पाठ-स्रोत इसे सामवेदान्तर्गत शैव उपनिषद् के रूप में प्रस्तुत करते हैं। १. मंगलाचरणरुद्राक्षोपनिषद्वेद्यं महारुद्रतयोज्ज्वलम् ।प्रतियोगिविनिर्मुक्तशिवमात्रपदं भजे ॥अर्थ:मैं उस परम शिव-तत्त्व का ध्यान करता हूँ, जो रुद्राक्ष-सम्बन्धी उपनिषद् द्वारा जाना जाता है, जो महान् रुद्र के तेज से प्रकाशित है और सभी द्वैत-विरोधों से रहित केवल शिवस्वरूप परम पद है।२. शान्ति-मंत्रॐ आप्यायन्तु ममाङ्गानि वाक्प्राणश्चक्षुःश्रोत्रमथो बलमिन्द्रियाणि च ।सर्वाणि सर्वं ब्रह्मोपनिषदं माहं