ध्रुव की तारा - भाग 13

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ध्रुव की ताराभाग - १३लेखिका: "अनामिका"​सिया के वे कड़वे शब्द तारा के सीने में सीधे तीर की तरह चुभे थे। ध्रुव के शहर छोड़कर जाने से उसकी ज़िंदगी में जो खालीपन आया था, सिया के इस अचानक और कठोर फैसले ने उसे पूरी तरह तोड़कर बिखेर दिया। स्कूल खत्म होते ही वह भारी कदमों से घर की तरफ लौट आई, लेकिन घर की चारदीवारी उसे काटने को दौड़ रही थी। न ध्रुव का साथ था, न सिया का दिलासा। वह खुद को पूरी दुनिया में एकदम तन्हा और बेबस महसूस कर रही थी।​शाम ढलते ही, अपने बेकाबू कदमों को संभालते