शाम के करीब 6:40 बजे।सूरत रेलवे स्टेशन हमेशा की तरह भीड़ से भरा हुआ था।कहीं कोई अपने परिवार को विदा कर रहा था, तो कहीं कोई अपनी ट्रेन का इंतज़ार करते हुए बार-बार घड़ी देख रहा था। प्लेटफॉर्म पर चाय वालों की आवाज़ें, यात्रियों की बातचीत और आती-जाती ट्रेनों का शोर लगातार गूंज रहा था।उसी भीड़ के बीच एक लड़का प्लेटफॉर्म के किनारे खड़ा था।आरव।उसकी नजरें सामने से गुजरती ट्रेनों पर थीं।एक ट्रेन आती…कुछ देर रुकती…और फिर चली जाती।लेकिन आरव बस खामोशी से उन्हें देखता रहता।उसके चेहरे पर कोई खास भाव नहीं था।जैसे वह यहां किसी का इंतज़ार नहीं कर