पापा के मुंह से "हां बेटा मजबूरी थी" सुनते ही आयशा का दिल टूट गया।वो भागकर हॉस्पिटल के कॉरिडोर में आ गई। पीछे अव्यांश खड़ा था। उसकी आँखों में गुस्सा नहीं, बल्कि दर्द था।"आयशा, सुनो तो...""मत आओ मेरे पास! तुमने सुना ना तुम्हारे पापा ने क्या कहा? मेरे पापा ने तुम्हारी कंपनी को धोखा दिया! अब तो तुम भी मुझे धोखेबाज कहोगे!"अव्यांश ने उसका हाथ कसकर पकड़ लिया। "मैं किसी के कहने पर प्यार नहीं करता, अपने दिल से करता हूँ। मुझे फर्क नहीं पड़ता तुम्हारे पापा ने क्या किया।"तभी अव्यांश के पापा, राजवीर राठौर वहां आ गए।"अव्यांश, चलो यहाँ