अधूरी किताबएपिसोड 74— हवेली में इंतज़ार करती माँहवेली की सबसे ऊपरी खिड़की में खड़ी वह औरत लगातार अनन्या को देख रही थी।उसकी कलाई पर बना निशान दूर से भी साफ दिखाई दे रहा था।वही निशान...जो अनन्या की कलाई पर बचपन से था।अनन्या की आँखें उसी पर टिक गईं।“माँ...”उसके मुँह से अपने आप निकला।लेकिन उसके सामने खड़ी औरत मुस्कुरा दी।वह मुस्कान माँ जैसी थी।बिल्कुल वैसी ही...जैसी अनन्या को अपनी बचपन की यादों में दिखाई देती थी।नैना ने अनन्या का हाथ पकड़ लिया।“दीदी, रुको।”अनन्या ने उसकी तरफ देखा।“वो मेरी माँ हैं।”“लेकिन अगर वो तुम्हारी माँ हैं तो यहाँ कैसे?”अनन्या के पास इसका