हमारा उद्देश्य क्या है?

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मनुष्य जब इस दुनिया में आता है, तब उसके हाथ में कोई नक्शा नहीं होता। उसे यह नहीं बताया जाता कि उसे किस रास्ते पर चलना है, कहाँ रुकना है और कहाँ पहुँचकर कहना है—“अब मेरा सफर पूरा हो गया।” वह धीरे-धीरे दूसरों को देखकर चलना सीखता है। परिवार उसे संस्कार देता है, समाज उसे नियम देता है, विद्यालय उसे ज्ञान देता है और परिस्थितियाँ उसे अनुभव देती हैं। लेकिन एक प्रश्न ऐसा है जिसका उत्तर अंततः उसे स्वयं खोजना पड़ता है—“मैं यहाँ क्यों हूँ और मेरे जीवन का उद्देश्य क्या है?”यही प्रश्न मनुष्य को सामान्य जीवन से अलग करके