एक अनजाना सा इश्क - भाग 1

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लखनऊ, नवाबों का शहर। शाम के सात बज रहे थे। हजरतगंज की रौशनी, चौक की चाट की खुशबू और गोमती नगर की ठंडी हवा, सब कुछ रोज की तरह ही था। पर आयशा के लिए आज कुछ भी रोज जैसा नहीं था।आयशा सिद्दीकी, इक्कीस साल की एक सीधी-सादी लड़की। लखनऊ यूनिवर्सिटी में बी.ए. फाइनल ईयर की छात्रा। पापा रफीक अहमद एक सरकारी स्कूल में अध्यापक थे। माँ घर संभालती थीं और एक छोटा भाई अमन था। आयशा को किताबें पढ़ना और डायरी लिखना बहुत पसंद था। वह अपनी डायरी में रोज कहानियाँ लिखती थी, पर उसकी अपनी जिंदगी की कहानी