शतं इन्नु शरदो अन्ति देवा

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ऋग्वेद सू्क्ति(55) की व्याख्या शतं इन्नु शरदो अन्ति देवाऋग्वेद --1/89/9भावार्थ--हे ईश्वर ! हम सौ वर्ष जिएँ। ऋग्वेद के इस मंत्र का पूरा पाठ इस प्रकार है—ऋग्वेद १.८९.९शतं इन्नु शरदो अन्ति देवायत्रा नश्चक्रा जरसं तनूनाम्।पुत्रासो यत्र पितरो भवन्तिमा नो मध्यारीरिषतायुर्गन्तोः॥पदच्छेदशतम् इत् नु शरदः अन्ति देवाः।यत्र नः चक्राः जरसम् तनूनाम्।पुत्रासः यत्र पितरः भवन्ति।मा नः मध्ये अरीरिषत् आयुः गन्तोः॥सरल हिन्दी अर्थहे देवो/परमेश्वर! हम सौ शरद् अर्थात् सौ वर्ष तक जीवित रहें। हमारी देह वृद्धावस्था को प्राप्त हो और हम दीर्घायु होकर जीवन की पूर्णता देखें। जिस समय हमारे पुत्र बड़े होकर हमारे समान उत्तरदायित्व सँभालने योग्य हो जाएँ और वे हमारे साथ पिता के समान