माटी से मुकाम तक

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माटी से मुकाम तकबिहारी और सुमति की प्रेम कहानीबरगवां गांव की कच्ची गलियों में पला-बढ़ा बिहारी चौहान गरीब जरूर था, लेकिन उसके सपने बहुत बड़े थे। संयुक्त परिवार की जिम्मेदारियां, पिता हरिराम की मेहनत, मां कमला का त्याग और घर की आर्थिक तंगी उसके रास्ते की सबसे बड़ी चुनौतियां थीं। फिर भी बिहारी मानता था कि गरीबी इंसान की किस्मत नहीं, सिर्फ एक परिस्थिति है।उच्च शिक्षा के लिए जब वह शहर पहुंचा तो उसकी दुनिया बदल गई। चमकती इमारतें, महंगे कपड़े और बड़े-बड़े सपने देखकर उसे अपनी साधारण जिंदगी छोटी जरूर लगी, लेकिन उसने हार नहीं मानी।इसी शहर में उसकी