बिसरे लम्हे... सच कहूं तो ये सिर्फ मेरी कहानी नहीं है, बल्कि मेरे वजूद का वो आईना है जिसमें सिर्फ और सिर्फ मैं नजर आता हूं। इंसान अपनी जिंदगी को अपने हिसाब से जीने के हजार ताने-बाने बुनता है, पर जिंदगी उसे अपने किस सांचे में ढालकर जी लेती है, इसका पता हमें बहुत बाद में चलता है। मैं भी आज बस वही बताने आया हूं कि मैंने क्या सोचा था और जिंदगी ने मुझे कैसे जिया।मेरा जन्म उस माटी में हुआ जहां हरियाली कभी आंखों से ओझल नहीं होती। भारत का वो पूर्वी हिस्सा जिसे छोटानागपुर कहते हैं, उसी