अपने केबिन में पहुँचकर अंकिता बुरी तरह काँप रही थी। उसके मन में सिर्फ एक ही ख्याल था—इस कंपनी को छोड़ना ही एकमात्र रास्ता है। उसने काँपते हाथों से अपना रिजाइन लेटर टाइप किया और उसे हेड ऑफिस में जाकर सौंप दिया। लेकिन जैसे ही रणविजय को इस रिजाइन के बारे में पता चला, उसकी हँसी पूरे ऑफिस में गूँज गई। वह एक खूंखार शेर की तरह अट्टहास कर रहा था, जैसे उसे पता था कि कोई भी उसके जाल से नहीं बच सकता।इधर अंकिता किसी तरह घर पहुँची और अपने कमरे में जाकर फूट-फूटकर रोने लगी। रोते-रोते उसे नींद