पंचब्रह्मोषनिषद

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---- : पञ्चब्रह्मोपनिषद्:---पञ्चब्रह्मोपनिषद् कृष्ण यजुर्वेद से सम्बद्ध शैव उपनिषद् है। इसमें भगवान् शिव के पाँच ब्रह्मस्वरूप—सद्योजात, अघोर, वामदेव, तत्पुरुष और ईशान—का निरूपण किया गया है और अन्ततः इन्हीं पाँच ---- : पञ्चब्रह्मोपनिषद्:---पञ्चब्रह्मोपनिषद् कृष्ण यजुर्वेद से सम्बद्ध शैव उपनिषद् है। इसमें भगवान् शिव के पाँच ब्रह्मस्वरूप—सद्योजात, अघोर, वामदेव, तत्पुरुष और ईशान—का निरूपण किया गया है और अन्ततः इन्हीं पाँच रूपों के आधारभूत अद्वैत ब्रह्म का प्रतिपादन किया गया है। उपलब्ध पाठ में श्लोकों की संख्या विभिन्न संस्करणों में कुछ भिन्न मिलती है।नीचे मैं मूल संस्कृत श्लोक और सरल हिन्दी अर्थ क्रम से दे रहा हूँ। ॥ पञ्चब्रह्मोपनिषत् ॥मंगलाचरणब्रह्मादिपञ्चब्रह्माणो यत्र विश्रान्तिमाप्नुयुः ।तदखण्डसुखाकारं रामचन्द्रपदं