[59]“ओह प्रभु। यह कैसे हो गया?”वह सरिता की तरफ मुड़ा। उसे सचेत करने का प्रयास करने लगा। कुछ प्रयासों के पश्चात वह रुक गया। युवक अभी भी वहीं खड़ा था। अभी भी सूर्योदय नहीं हुआ था किन्तु प्रकाश में थोड़ी वृद्धि हो गई थी। शैल ने युवक को ऊपर से नीचे तक देखा। पूरा निरीक्षण किया, “तुम कौन हो? यहाँ क्या कर रहे थे?”युवक ने मंद स्वर में धीरे धीरे बोलना प्रारंभ किया, “मैं यहाँ के मंदिर के पुजारी का पुत्र हूँ। प्रात: काल मैं ब्रह्म स्नान के लिए नदी में उतरा तब मैंने इन्हें देखा। वह डूब रही थी। उसे