प्रतिक्रमन सूत्र - 3

🪷 अध्याय 20लोगस्स सूत्र — प्रत्येक गाथा का अर्थ एवं 24 तीर्थंकरों का आध्यात्मिक संदेश1. लोगस्स सूत्र का परिचयलोगस्स प्रतिक्रमण में पढ़ा जाने वाला अत्यंत महत्वपूर्ण स्तवन है। इसमें चौबीस तीर्थंकरों का स्मरण और वंदन किया जाता है।इसका उद्देश्य केवल तीर्थंकरों के नाम लेना नहीं है, बल्कि उनके वीतरागता, केवलज्ञान, संयम, तप, करुणा और आत्मविजय जैसे गुणों का स्मरण करना है।गाथा 1मूल पाठलोगस्स उज्जोयगरे,धम्मतित्थयरे जिणे।अरिहंते कित्तइस्सं,चउवीसं पि केवली॥शब्दार्थलोगस्स — लोक केउज्जोयगरे — प्रकाश करने वालेधम्मतित्थयरे — धर्मतीर्थ की स्थापना करने वालेजिणे — जिन/विजेताअरिहंते — अरिहंतों कोकित्तइस्सं — मैं कीर्तन/स्तुति करूँगाचउवीसं — चौबीसपि — भीकेवली — केवलज्ञानीसरल हिन्दी अर्थमैं उन चौबीस