गरुड़ोंपनिषद

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---- : गरुड़ोपनिषद:---गरुड़ोपनिषद अथर्ववेद से संबद्ध वैष्णव उपनिषद् के रूप में सूचीबद्ध है। इसका मुख्य विषय विष-निवारण से संबंधित मंत्र हैं। वास्तविक सर्पदंश या विषाक्तता की स्थिति में तत्काल चिकित्सा सहायता आवश्यक है; मंत्र चिकित्सा का विकल्प नहीं हैं।॥ श्रीगरुड़ोपनिषद् ॥मूलपाठ एवं हिन्दी अर्थ१. मंगल-वचनमूल पाठविषं ब्रह्मातिरिक्तं स्यादमृतं ब्रह्ममात्रकम्।ब्रह्मातिरिक्तं विषवद् ब्रह्ममात्रं खगेडहम्॥सरल अर्थजो ब्रह्म से भिन्न है, वह विष के समान माना गया है और जो ब्रह्मस्वरूप है, वही अमृत है। हे खगश्रेष्ठ! मैं उस ब्रह्मस्वरूप तत्त्व को प्रणाम करता हूँ। आरम्भिक वचन में ब्रह्म को अमृतस्वरूप तथा अज्ञान और ब्रह्म-विमुखता को विष के समान बताया गया है।२. शान्तिपाठॐ भद्रं कर्णेभिः