सुबह के करीब साढे नौ बजे ऑफिस का माहौल हमेशा की तरह व्यस्त था.कहीं फोन की घंटियाँ बज रही थीं, कहीं कंप्यूटर कीबोर्ड पर उंगलियाँ तेजी से चल रही थीं. कोई Meeting की तैयारी कर रहा था तो कोई अपने बॉस के आने का इंतजार.राहुल अपनी सीट पर चुपचाप बैठा स्क्रीन को देख रहा था.ऑफिस में आए उसे कुछ ही दिन हुए थे, लेकिन अब भी उसके लिए हर चीज नई थी.नए लोग.नई जिम्मेदारियाँ.और सबसे बढकर—खुद को साबित करने का दबाव.पहले दिन से ही कुछ लोग उसका मजाक उडाते थे.गाँव से आया है, इसे ऑफिस का क्या पता होगा?देखना, दो