सुबह के करीब पाँच बज रहे थे.पूरी हवेली नींद में डूबी हुई थी.लेकिन अंजलि की आंखों में नींद का नाम तक नहीं था.वह बालकनी में अकेली बैठी थी.उसके हाथ में एक पुरानी तस्वीर थी.तस्वीर में दो लोग मुस्कुरा रहे थे.एक राहुल.और दूसरी अंजलि.छह साल पहले की तस्वीर.अंजलि ने तस्वीर को सीने से लगा लिया.उसकी आंखों के सामने अचानक वही पुराना समय घूमने लगा.छह साल पहले.Collage का आखिरी साल था.अंजलि हमेशा की तरह Collage के गेट से अंदर आई थी.तभी पीछे से आवाज आई—मैडम, इतनी जल्दी?अंजलि ने पलटकर देखा.राहुल हाथ में दो कप चाय लिए खडा था.मैं तुम्हारी मैडम कब से