अंजलि के कमरे में उस वक्त ऐसी खामोशी थी, जैसे हवा भी किसी जवाब का इंतजार कर रही हो.उसके सामने बैठा राहुल लगातार जमीन की तरफ देख रहा था.कुछ घंटे पहले तक अंजलि को उम्मीद थी कि शायद दाढी हटने के बाद सब कुछ बदल जाएगा.शायद राहुल उसे देखते ही पहचान लेगा.शायद उसकी आंखों में वही पुराना प्यार लौट आएगा.शायद वह मुस्कुराकर कहेगा—अंजलि. तुम?लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ.राहुल उसे देख रहा था.मगर पहचान नहीं रहा था.अंजलि ने कांपती आवाज में पूछा—राहुल. तुम्हें मेरा नाम याद नहीं?राहुल ने धीरे से सिर हिलाया.नहीं।अंजलि की आंखों में आंसू भर आए.और. हमारा घर?नहीं।कॉलेज?नहीं।वो जगह