सैलून से वापस आते समय अंजलि पूरे रास्ते चुप रही.उसकी आंखों के सामने बार- बार वही चेहरा आ रहा था.राहुल का चेहरा.आज पहली बार उसने राहुल को बिना दाढी और मूंछ के देखा था.और उस चेहरे ने उसकी सारी पुरानी यादें फिर से जिंदा कर दी थीं.वह चेहरा जिसे अंजलि ने कभी अपने दिल में बसाया था.वही आंखें.वही मुस्कान.वही आवाज.वही चेहरा.जिसे उसने कभी अपनी जिंदगी का सबसे खूबसूरत हिस्सा माना था.अंजलि की आंखों से आंसू निकल आए.राहुल पीछे बैठा था.उसने शीशे में अंजलि को देखा.मैडम. आप फिर रो रही हैं?अंजलि ने तुरंत अपने आंसू पोंछ लिए.नहीं।लेकिन मैंने देखा।बस आंखों में