ध्रुव की तारा - भाग 6

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ध्रुव की ताराभाग - ६लेखिका "अनामिका" दिन भर की भागदौड़ के बाद रात के सन्नाटे में तारा अकेली बालकनी में खड़ी थी। सामने आसमान में चाँद-सितारे चमक रहे थे और ठंडी हवा के हल्के झोंके चेहरे को छू रहे थे। तारा उस खूबसूरत नज़ारे को निहारते हुए दिन भर की बातों में उलझी थी। उसके दिमाग में बस यही सवाल घूम रहा था—जब ध्रुव और सिया एक-दूसरे के करीब होते हैं, तो उसके दिल में यह अजीब सी टीस क्यों उठती है?​"यहाँ अकेली क्या कर रही हो, चश्मिश?" ध्रुव की आवाज़ से उसकी सोच का सिलसिला टूटा। वह धीरे से