ध्रुव की तारा - भाग 5

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ध्रुव की ताराभाग - ५ लेखिका "अनामिका" ​बुआ ने मुस्कुराते हुए सबका स्वागत किया, "अरे बच्चों, आओ-आओ, अंदर आ जाओ! बिल्कुल शर्माने की ज़रूरत नहीं है, इसे अपना ही घर समझो। तारा, तुम सिया को लेकर अपने कमरे में चली जाओ। और तुम दोनों लड़के... सामने वाले कमरे में शिफ्ट हो जाओ। जल्दी से फ्रेश हो जाओ, तब तक मैं खाना लगाती हूँ।"​कमरों में जाने के बाद ध्रुव से खुद पर काबू नहीं रखा गया। वह तारा के पास आकर धीरे से बोला, "यार चश्मिश, तू तो सच बोल रही थी! तेरी बुआ तो दूर-दूर से बुआ लगती ही नहीं