जब रिश्ता प्यार बन जाए. - 18

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Episode 18 – जब “हम” सबको बताया गयाकुछ रिश्तेपहले दिल में स्वीकार होते हैं,फिर शब्दों में उतरते हैं,और सबसे आख़िर मेंघर की दीवारों तक पहुँचते हैं।और जब वे वहाँ पहुँचते हैं,तो डर पीछे रह जाता है—सिर्फ़ सच्चाई आगे चलती है।क्योंकि किसी रिश्ते को अपना मान लेना जितना आसान लगता है,उसे दुनिया के सामने स्वीकार करना उतना ही आसान नहीं होता।दिल अपने फैसले बहुत पहले ले लेता है,लेकिन शब्दों को उन फैसलों तक पहुँचने में थोड़ा समय लगता है।Episode 17 के बादPriyam के भीतरएक अजीब-सी स्थिरता थी।अब मन मेंकोई अधूरी बात नहीं घूम रही थी।ना “अगर”,ना “लेकिन”।जिन सवालों ने इतने दिनों