पितृ दोष

  • 99

बाबू राम किसी गाँव में एक प्राइमरी स्कूल के अध्यापक थे। उनका एक बेटा था मोहन। मोहन अपनी बीवी के साथ शहर में किराए पर रहता था। बाबूराम का गाँव में बड़ा सा घर था। उसने अपने बेटे-बहू के लिए दो मंजिल और बनवा दी।लेकिन मोहन की बीवी शालू बहुत चालाक थी। वह अनपढ़ थी, कभी स्कूल नहीं गई लेकिन पैसों के मामले में बहुत हिसाबी थी। शालू मोहन के कान भरती रहती। "अजी हमारे दो बेटे हैं, जब शहर में पढ़ रहे हैं तो गांव में जाकर तो नहीं रहेंगे। तुम्हारे पिताजी इस साल रिटायर हो रहे हैं। गांव