श्री सरस्वती रहस्योपनिषद

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श्रीसरस्वतीरहस्योपनिषद-- सरस्वती  रहस्य उपनिषद् को सामान्यतः कृष्ण यजुर्वेद से सम्बद्ध शाक्त उपनिषद् माना जाता है, न कि अथर्ववेद से। यह शाक्त उपनिषदों में गिना जाती है। १. शान्तिपाठॐ वाङ्मे मनसि प्रतिष्ठिता मनो मे वाचि प्रतिष्ठितम्।आविरावीर्म एधि। वेदस्य म आणीस्थः।श्रुतं मे मा प्रहासीरनेनाधीतेनाहोरात्रान्सन्दधामि।ऋतं वदिष्यामि। सत्यं वदिष्यामि।तन्मामवतु। तद्वक्तारमवतु।अवतु माम्। अवतु वक्तारम्॥ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥भावार्थहे परम सत्य! मेरी वाणी मेरे मन में स्थित हो और मेरा मन मेरी वाणी में स्थित हो। आप मेरे समक्ष प्रकाशित हों। जो ज्ञान मैंने सुना और पढ़ा है, वह मुझसे दूर न हो। मैं सत्य और ऋत का पालन करूँ। परमात्मा मेरी और मेरे गुरु अथवा वक्ता की