गाँव का लगाव

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शहर की भागदौड़ से दूर, अमित पूरे पंद्रह साल बाद अपने पुश्तैनी गाँव लौटा था। गांव के पगडंडी पर चलते-चलते उसको बचपन की यादें आने लगी उसका बचपन इसी गांव में बीता था। उसके पिता जी के गुज़रने के बाद गाँव से उनका नाता लगभग टूट सा गया था। अमित शहर में एक अच्छी नौकरी कर रहा था, लेकिन गाँव में मौजूद उनका विशाल पुश्तैनी घर सालों से बंद पड़ा था। अब अमित उसी पुराने घर को बेचने के इरादे से गाँव आया था ताकि उस पैसे से शहर में एक नया फ्लैट खरीद सके।जैसे ही अमित की गाड़ी गाँव की