खामोशी की छांव में - भाग 1

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खामोशी की छांव मेंबहुत पुरानी बात नहीं है, यह उस दौर की कहानी है जब लोग आँखों से दिलों का हाल पढ़ लिया करते थे। शहर के बीचों-बीच बसा पुराना कॉलेज, जिसकी दीवारों पर इतिहास की परतें जमी थीं और गलियारों में किताबों की महक के साथ जवानी की धड़कनें गूँजा करती थीं। इसी कॉलेज में कबीर पढ़ता था—एक ऐसा लड़का जो शब्दों से कम और अपनी खामोश निगाहों से ज़्यादा बात करता था। उसकी दुनिया किताबों, कागज़ के पन्नों और अपनी कविताओं तक सीमित थी। उसे भीड़भाड़ और शोर शराबे से कोसों दूर रहना पसंद था। कबीर की ज़िंदगी