Devil की दास्तान - 45

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(पुराना वीरान शहर, जहाँ कभी "अमृत प्रोजेक्ट" की लैब हुआ करती थी। धुंध फैली हुई है। हवा में राख के कण उड़ रहे हैं। कहीं दूर एक जली हुई गाड़ी से चिंगारियाँ उठ रही हैं।)(कबीर अकेला सड़क पर चलता जा रहा है। उसके चेहरे पर थकान और टूटन दोनों हैं। उसकी आँखों में सिया की झलक अब भी तैर रही है — उसकी मुस्कान, उसके आँसू, और वो आख़िरी नज़र...)कबीर (धीरे, खुद से) बोला - “वो चली गई…शायद सही किया…क्योंकि एक सैतान को प्यार करना, इंसान के बस की बात नहीं।”(वो रुकता है, एक पत्थर पर बैठता है। उसके हाथ में