कलि-सन्तरण उपनिषद्--कलि-सन्तरण उपनिषद् अथर्ववेद से सम्बद्ध एक लघु उपनिषद् माना जाता है। इसमें कलियुग के दोषों से पार होने के उपाय के रूप में भगवान् के नाम-स्मरण का वर्णन है।१. प्रारम्भिक प्रश्नमूल पाठॐ नारदो ब्रह्माणं जगाम।कथं भगवन् गाम् पर्यटन् कलिं संतरेयमिति।स होवाच ब्रह्मा—साधु पृष्टोऽस्मि।सर्वश्रुतिरहस्यं गोप्यं तच्छृणु, येन कलिं तरिष्यसि॥सरल हिन्दी अर्थएक समय देवर्षि नारद ब्रह्माजी के पास गए और बोले—“हे भगवन्! मैं संसार में विचरण करते हुए कलियुग के दोषों से किस प्रकार पार हो सकता हूँ?”ब्रह्माजी ने कहा—“तुमने बहुत उत्तम प्रश्न किया है। अब वह गोपनीय रहस्य सुनो, जिसे जानकर और अपनाकर तुम कलियुग के दोषों से पार हो