राहें - 28

गवाहीमैं सुबह से ही व्यस्त थी । घर के सारे काम मुझे ही निपटाने थे। क्योंकि पुत्रवधु कुछ दिनों सेमायके गई हुई थी। ऊपर से पति का बार - बार कोर्ट में गवाहो देने जाने का आग्रह , अच्छा नहींलग रहा था परन्तु कोर्ट का आदेश है तो मानना ही है , सोचकर मै जल्दी जल्दी काम में लगगई। रही -सही कसर श्रवण ने पूरी कर दी थी। उसे भी आज ही छुट्टी मनाना था। इस पकी आयुमें काम भी तो जल्दी-जल्दी नहीं हो पाता है। आखिरकार काम निपटाया और मैं तैयार होकर कोर्टमें गवाही देने चल दी। कोर्ट के