मंगलसूत्रशंशाक की शादी का कार्ड मिलते ही सोनम खुशी से नाचउठी। उसकी सखी कुसूम के बेटे शंशाक के लिये वह भी एक अच्छीलड़की की तलाश में थी, मन में संतोष की सांस लेते हुए उसने सोचाकुसुम ने अच्छी ही लड़की देखी होगी। अब कुसुम अपने दायित्व सेमुक्त होकर आराम से रहेगी, उसकी जिम्मेदारियाँ अब पूरी होजायेगी। असमय पति दिलीप की मृत्यु के बाद से कुसुम बहुतपरेशान थी। तीन-तीन बच्चों को पालना, पढ़ाना-लिखाना फिरउनकी शादी करना और लड़कों को व्यापार में संलग्न कर आगेबढ़ाना, कोई सरल काम नहीं था परन्तु कुसुम मेहनत का पर्याय बनगई थी, कड़ी मेहनत कर उसने अपनी