कुछ दिन बीत गए। विवान अब बिल्कुल ठीक था और चौहान हवेली में फिर से पहले जैसी हलचल लौट आई थी। लेकिन संयोगिता के अपने घर में एक अलग ही बात चल रही थी।शाम को वह अपने माता-पिता के साथ बैठी थी। माँ काफी देर से उसे देख रही थीं। आखिरकार उन्होंने बात शुरू की।माँ बोलीं - बेटा…संयोगिता ने उनकी तरफ देखा।संयोगिता बोली - जी माँ?माँ ने प्यार से उसका हाथ पकड़ लिया।माँ बोलीं - तुम 26 की हो गई हो। आखिर कब शादी करोगी?संयोगिता कुछ पल बिल्कुल शांत रही। उसके दिमाग में अचानक विवान का चेहरा आ गया। फिर विराट…और संपूर्णा की