पंद्रह मिनट बाद चौहान हवेली का दरवाज़ा खुला। संयोगिता तेज़ी से अंदर आई। उसके आते ही विवान की नजर उस पर पड़ी। वो तुरंत दौड़कर उसके पास आया और उससे लिपट गया।विवान बोला - मम्मा!संयोगिता ने उसे अपनी बाँहों में भर लिया और गोद में उठा लिया। उसके चेहरे पर पहली बार खुली हुई प्यारी मुस्कान आई।संयोगिता बोली - अरे मेरा राजा बाबू… क्या चाहिए आपको?विवान ने अपनी छोटी-छोटी बाँहें उसके गले में डाल दीं।विवान बोला - मिल्कशेक…संयोगिता हँस पड़ी।संयोगिता बोली - बस इतनी सी बात के लिए मेरा राजा बाबू इतना रो रहा था?विवान ने मासूमियत से कहा—आपके हाथों का चाहिए।संयोगिता कुछ पल