सौम्या की यात्रा

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सौम्या अपने मायके आई हुई थी। बहुत दिनों बाद आई थी, सो मन में एक अलग ही उमंग थी। शाम ढलने लगी तो उसने अपनी मम्मी से कहा, "मम्मी, चलो न शाम को घूमने चलते हैं। अपना वाला प्लॉट भी दिखाकर लाओ। पैदल ही चलते हैं, घूमना भी हो जाएगा।"मम्मी कुछ देर चुप रहीं। उनकी आँखों में एक खालीपन था। बीमारी के कारण पिछले कुछ समय से उनकी स्मृति बहुत कमजोर हो गई थी। बातें भूल जाती थीं, रास्ते भूल जाती थीं। उन्होंने धीरे से कहा, "बेटा, मुझे रास्ता याद नहीं आ रहा। पास वाले पार्क में घुमा लाती हूँ।