Devil की दास्तान - 43

मंदिर का अंदरूनी हिस्सा—धीमी अब्बर-लाल रोशनी, अगरबत्तियों की खुशबू हवा में फैली है। दीवारों पर भैरव की मूर्ति अर्ध-छायाँ में छपी हुई है। कनपालिका सन्नाटा। करन/कबीर सिया को अपनी बाँहों में थामे मंदिर के बीच बैठे हुए है। सिया आँखें बंद किए बेहोश पड़ी है — चेहरा पीला, चोंटा टूटा-सा, साँसें धीमी।जैसे ही सिया ठीक होने की कगार पर थी — उसकी शक्ति थम गई, और वह अपनी बिल्कुल निर्बल अवस्था में करन की बाँहों में गिर पड़ी। करन के लिए उस पल ने सब कुछ रोक दिया — समय, हवा, साँसें। अब सिर्फ़ एक करार था: उसे बचाना।कबीर धीरे-धीरे