भाग ४ — पत्नी की शिकायतेंरात को हर्ष का मैसेज पढ़ने के बाद भी मिहिर को नींद नहीं आई।निशा उसके बगल में सो रही थी।मिहिर छत की ओर देख रहा था।पिछले कुछ दिनों में बहुत कुछ बदल गया था।पापा की डायरी ने उसे अपने पिता की आँखों से अपनी ही जिंदगी को देखने की सीख दी थी।मम्मी और निशा के बीच का तनाव भी थोड़ा कम हुआ था।लेकिन अब मिहिर के मन में एक सवाल था—निशा आखिर कितने समय से अकेली थी?उसने कभी उसकी शिकायतों को गंभीरता से सुना ही नहीं था।हर बार उसे लगता—“घर की छोटी-सी बात है।”लेकिन शायद