अब आगे ,सिया और सुहानी ने सांझ को ले जाकर मंडप में बैठा दिया । पंडित जी ने शादी के मंत्र पढ़ने शुरू कर दिए। सांझ चेहरे पे बिना किसी भाव के आंखों में आसूं लिए भीगी पलकों से हवन कुंड की अग्नि की तरफ़ एक टक देखे जा रही थी , और सोच रही थी की इस अनचाही शादी को करने से अच्छा वो अपनी जान दे दे । लेकिन वो चाह कर भी कुछ नहीं सकती थी । कुछ देर बाद , " विवाह संपन्न हुआ आज से आप दोनों पति पत्नी हैं अब आप लोग सभी बड़ों का आशीर्वाद