ट्रेन अपनी पूरी रफ्तार से दौड़ रही थी और मेरा दिमाग भी उसी रफ्तार से अतीत की गलियों में भटक रहा था। न जाने नानी कैसी होंगी? क्या वो मुझे देखकर खुश होंगी? और चाचा? क्या चाचा और उनका परिवार मुझे देखकर अपनाएगा, जैसे कभी बचपन में अपनाया था? उनके बच्चे भी तो अब बड़े हो गए होंगे। वही बच्चे, जिनकी वजह से मैंने कभी ये घर छोड़ दिया था। बचपन की कितनी सारी बातें एक-एक करके मेरी आँखों के सामने आने लगीं। माँ की दूसरी शादी नानी ने ही करवाई थी। मुझे लगा था कि अब शायद मेरी जिंदगी