एपिसोड 43 — कमरा नंबर 27रात के करीब नौ बज चुके थे।वशिष्ठ हवेली के बाहर गाड़ियों की आवाजाही लगभग बंद हो चुकी थी। पूरा घर शांत था, लेकिन अर्जुन के कमरे में किसी को चैन नहीं था।मेज पर कमरे नंबर 27 वाली छोटी-सी पर्ची रखी थी।अर्जुन उसके सामने खड़ा था और लगातार उसी को देख रहा था।गौरव कुर्सी पर बैठा बोला,"यार, तू पिछले दस मिनट से इसी पर्ची को देख रहा है। इसमें ऐसा क्या लिखा है?"अर्जुन ने उसकी तरफ देखा।"क्योंकि मुझे लगता है कि मेरे पिता ने ये सिर्फ एक कमरे का नंबर नहीं छोड़ा था।"विवेक भी पास आकर