एक पुरुष—सबके बीच अकेला - 3

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भाग ३ — पापा की अपेक्षाएँमिहिर ने सोचा था कि घर का माहौल अब थोड़ा हल्का हो जाएगा।लेकिन जिंदगी में कुछ शांतियाँ सिर्फ तूफान आने से पहले आती हैं।वह दिन भी सामान्य तरीके से शुरू हुआ।सुबह की चाय, नाश्ता, ऑफिस की भागदौड़ और घर की छोटी-बड़ी बातें।मिहिर ऑफिस जाने के लिए निकल रहा था, तभी पापा ने पीछे से कहा,“मिहिर, आज शाम को जल्दी आ जाना।”मिहिर रुक गया।“क्यों पापा?”“मुझे तुमसे थोड़ी जरूरी बात करनी है।”“क्या बात है?”“तुम घर आओगे तब करेंगे।”मिहिर ने पापा के चेहरे की तरफ देखा।चेहरे पर गंभीरता थी।“ठीक है।”⸻पूरा दिन मिहिर के मन में पापा की बात