अधूरी किताब – सीजन 2एपिसोड 58 : नैना की आँखों में छिपा राज़रात के लगभग बारह बज चुके थे।शहर की सड़कें अब पहले से शांत थीं, लेकिन ऊँची इमारतों की खिड़कियों में जलती रोशनियाँ अब भी बता रही थीं कि शहर पूरी तरह सोया नहीं था।एक पुरानी इमारत के सामने अनन्या, आरव और कबीर आकर रुक गए।इमारत बाकी इमारतों से बिल्कुल अलग थी।उसकी दीवारों पर पुरानी दरारें थीं।खिड़कियों के शीशे टूटे हुए थे।और सबसे अजीब बात...इमारत की सबसे ऊपरी मंज़िल पर सिर्फ एक खिड़की में रोशनी जल रही थी।अनन्या ने उस खिड़की को देखते हुए कहा—"नैना वहीं है।"आरव ने आसपास