प्राचीन समय की बात है। हिमालय की गोद में बसा एक छोटा सा गाँव था जिसका नाम शिवपुर था। उस गाँव में आरती नाम की एक गरीब लड़की अपनी बूढ़ी माँ के साथ रहती थी। आरती के पिता का देहांत बचपन में ही हो गया था। घर की सारी जिम्मेदारी आरती पर थी। वह दिन भर खेतों में काम करती और शाम को भोले बाबा के मंदिर में दिया जलाने जाती।आरती का नियम था, चाहे कितनी भी थकान हो, वह बिना मंदिर गए सोती नहीं थी। गाँव के लोग उसकी भक्ति की हंसी उड़ाते थे। कहते थे, पूजा करने से