अभी-परीक्षा शेष हैमैं बरामदें में बैठी मोबाइल देख रही थी। दरवाजे पर आहट नेमेरा ध्यान खींचा ,गेट तक दुष्टि घुमाई तो श्रीमती लता तिवारी अपनीबेटी वर्षा के साथ आ रही थी। चेहरे पर चिरपरिचित सौम्य आकर्षकमुस्कान व जीवन के खट्टे -मीठे अनुभवों की छाप लिये वह मेरेनिकट और मैं उनके निकट पहुंच गयी और हम दोनो एक दूसरे कोगले लगाकर गहन आत्मीयता का अनुभव करती हुयी, कमरे में बैठगई। श्रीमती लता तिवारी कहने लगी "अब गोंदिया जा रही हूँ तोसोची ,आप से मिल लूँ फिर ना जाने कब आपसे मिलना हो" ।मैने आश्चर्य से उनकी ओर देखते हुये पूछा -