ख़ाकी बिंदिया - भाग 2

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नया शहर… नया घर… नई दिनचर्या…ज़रूरत का सामान जुटाना, नए लोगों से परिचय और छुट्टियों में आसपास की पहाड़ियों पर घूमना—इन्हीं सबके बीच शुरुआती कुछ महीने कब बीत गए, उन्हें पता ही नहीं चला।धीरे-धीरे जीवन अपनी सामान्य गति से चलने लगा।मृदुला घर सँवारने के लिए कुछ न कुछ नया करती रहती। दूसरी ओर अभिनव अपने काम के साथ-साथ पदोन्नति की परीक्षा की तैयारी में जुट गया था। रात को वह पढ़ने बैठता तो मृदुला भी उसके पास आ बैठती। कभी कोई पत्रिका पढ़ती, तो कभी उनमें से अपने पसंदीदा लेख काटकर बड़ी सहेजकर अपनी स्क्रैप बुक में चिपकाती रहती।जिस दिन